दिखावा
दिखावा- वर्तमान युग जहाँ तकनीकी के दौर मे आगे बढ़ रहा है,वहीं दूसरी तरफ दिखावे की चरम सीमा पार कर रहा है।इंसान का विवेक इतना खो चुका है कि उसको ये भी नहीं पता कि क्या दिखाना चाहिए और क्या नहीं। आजकल शादी ब्याह मे लोग शादी को संस्कार नहीं मानकर एक खेल मान लिया है।जिस तरह खेल मे लोग अलग अलग रूप करके अपनी भूमिका निभाते है उसी तरह शादी मे तरह तरह के दिखावे रूपी नाटक रचे जा रहे है।एक समय था जब शादी को एक पूजा समझकर उसको विधि विधान से,अनुशासन से,संस्कारो से सजाया जाता था,आज फैशन की इस चकाचोंध ने सभी संस्कारो का समूल नाश कर दिया है।एक समय मे पति पत्नी का रिश्ता केवल चार दीवारी के अंदर रहता था,आज वो दिखावे की वस्तु बन गई है। जिसे देखो वो अपने इस सुंदर रिश्ते को दुनिया के सामने नग्न कर रहा है।पहले लोग जो चीजे केवल फिल्मो मे देखते थे आज हर इंसान एक फ़िल्म बन चुका है। आजकल शादियों मे दूल्हे दुल्हन एक प्रदर्शनी की वस्तु बन चुकी है।न उन्हें बड़ो का कोई लिहाज रहा और न ही कोई जिझक रही।और ऊपर से एक नया ट्रेंड चल गया है जिसे आजकल प्री वेडिंग शूट कहते है जो शर्म को आत्म...