मदर्स डे स्पेशल----माँ का सच
Happy mothers day माँ, शब्द सुनते ही तन और मन मे एक तरंग सी उठती है।माँ एक ऐसा पहला शब्द है जो इस दुनिया मे कदम रखते ही इंसान सीख जाता है।इस दुनिया मे आते ही जो बिना पढ़े,केवल माँ के स्पर्श मात्र से ही एक नवजात बच्चा उसको अनुभव कर लेता है।माँ वो शब्द है जो बच्चा अपने जन्म के साथ ही लेकर आता है,बाकी के सारे शब्द वो दुनिया मे आकर सीखता है।इसलिए शब्दों के अथाह सागर मे जो पहला और अनमोल शब्द है वो माँ है। माँ को स्वयं भगवान ने अपने से भी ऊंचा दर्जा दिया है।जो इंसान मातृ भक्ति करता है,उसे तो किसी और भक्ति की आवश्यकता ही नहीं होती है।सबसे बड़ी भक्ति मातृ भक्ति ही होती है और शायद इसीलिये स्वयं भगवान को इस भक्ति का आनंद लेने के लिए माँ के गर्भ मे आना पड़ा। माँ का आँचल तो ईश्वर को भी प्यारा है,वो भी इसकी छाया का सुख प्राप्त करने के लिए लालायित रहते है। माँ वो त्याग है,वो समपर्ण है,जिसकी बराबरी दुनिया मे कोई नहीं कर सकता। एक बार इतिहासकार टोडरमल ने अपनी माँ से कहा कि है माँ! मैं तेरा कर्जा उतारना चाहता हु,रोज रोज ये शब्द सुनकर थक गया हूं कि माँ का कर्जा ...