मेरा सच-चरण 15 -मेरी शादी और बी ए प्रथम वर्ष की परीक्षा

बी.ए. फर्स्ट ईयर मे आते ही पापा मम्मी मेरी शादी की योजना बनाने लगे।पंडित जी के पास जाकर शादी का मुहूर्त निकलवाने गए।

4 मई का मुहूर्त निकला था,पापा को शादी के लिए वही टाइम सबसे उचित लगा क्योकि उस समय सबकी परीक्षाएं खत्म हो जाती है।। मम्मी पापा आठ नो महीने पहले ही तैयारी करने मे लग गए,क्योकि शादी मेरे दादा जी के गाँव जाकर करनी थी।मार्च 1998 को मेरे फर्स्ट ईयर exam का टाइम टेबल भी आ गया  जिसमें अप्रैल से जून तक का टाइम था क्योकि हर पेपर मे काफी गैप होता था।मुझे exam की तैयारी भी करनी थी और शादी की तैयारी मे मम्मी का हाथ भी बटाना था। एक तरफ शादी की तारीख फिक्स हो गई और दूसरी तरफ अचानक से मेरे सभी रियल और cousin भाई बहनों के exam हड़ताल की वजह से पोसपोंड होकर आगे बढ़ गए जहाँ अप्रैल मे exam ख़त्म होने वाले थे वहां वो एग्जाम अब अप्रैल  मे शुरु होंगे,इस बात से पापा भी टेंशन मे आ गए कि अब कैसे क्या होगा? उस समय मेरे पुरे परिवार मे पहली शादी मेरी ही थी,जिसका हर को क्रेज था।मेरे सभी भाई बहनों ने मेरी शादी के लिए अपना एक साल खराब कर दिया और किसी ने exam नहीं दिए। पर मैंने सब एग्जाम दिए,यहाँ तक कि शादी के एक दिन पहले हिंदी का exam था,एक तरफ नाच गाना हो रहा था,मेरी बहन एक हाथ मे मेहँदी लगा रही थी और दूसरे हाथ से मैं किताब पढ़ रही थी।exam के दिन सुबह गाँव से बस मे बैठकर उदयपुर exam देने आई।
                 अगले दिन 4 मई 1998 को मेरी शादी हुई

गाँव के रस्म रिवाजो से,पुरे घूंघट मे मेरा विवाह हुआ।कोई सहेलिया नहीं आ पाई,इस चीज का बहुत दुःख हुआ।पर एक बचपन की मेरी प्रिय सहेली और उसके पापा जरूर आये थे जिनके स्कूल मे मैं फ्री मे पढ़ी।वो गुरु जी भी आये जिन्होंने फ्री मे मुझे ट्यूशन पढ़ाया।   शादी सम्पन हुई और विदाई का क्षण आया और मेरा छोटा भाई पप्पु बहुत रोया

और हम तब तक एक दूसरे को  देखते रहे जब तक  बस  रवाना न हुई।जो पापा मम्मी अब तक मुझे डाँटते रहते थे आज उनकी आँखों मे अपार प्रेम  उमड़ रहा था।

जिन पापा की आँखों के सामने आँखे करके कभी बात नहीं करी आज उनसे लिपट कर इतना रोईं और भगवान् से मन ही मन एक शिकायत करी की मुझे मेरे पापा का प्रेम अब तक क्यों नहीं मिला?
                          मैं  पापा के प्रेम की इस कमी को अब अपने नए जीवन मे तलाश रही थी कि मुझे मेरे पति का प्रेम हमेशा मिले पर नियति किसके भाग्य मे क्या लिखती है कोई नहीं जानता।  बहुत सारी उम्मीदों को मन मे संजोये हुए सुसराल की सीढ़ी पर पहला कदम रखती हूं।

अपने नए जीवन की कहानी मे और क्या क्या  मोड़ आते है जिन्हें अपनी आगे  की कहानी मे आपके साथ शेयर करुँगी।
               "सत्यम    शिवम।    सुंदरम"।।

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