मेरा सच-चरण 18 सासु माँ ने ली मेरे आत्म सम्मान की परीक्षा
और इन्ही घरेलू झगड़ो के कारण शादी के तुरंत तीन महीने बाद ही मुझे काम के लिए घर से निकलना पड़ा।इसी दौरान मैं प्रेगनेंट भी हो गई।
घर की परिस्थियों को देखते हुए मैं जल्दी बच्चा नहीं चाहती थी।पर जब डॉक्टर को बताने गईं तो डॉक्टर ने कोई भी रिस्क लेने के लिए मना कर दिया।इसलिए मैंने ईश्वर की मर्जी समझकर स्वीकार किया।उस समय बी ए सेकंड ईयर की पढाई भी कर रही थी।सुसराल के हालात,पढाई और पार्लर की नोकरी साथ साथ चल रही थी।उस पार्लर की मेडम बहुत ही दयालु थी।मेरा बहुत ध्यान रखती,मुझे जूस,फ्रूट बराबर देती और मुझे हिम्मत देती थी। कई बार monthly chekup के लिए भी वो मेडम ही मुझे हॉस्पिटल ले जाती थी।
एक दिन की बात है मेरे पापा और मेरे ससुर की रास्ते मे मुलाक़ात हो गई।पापा ने हालचाल पूछा तो मेरे ससुर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आपका दामाद घर के खर्चे नहीं उठाता,आप उसे समझा देना।पापा ने अपने उत्तर मे कहा कि वो मेरा दामाद बाद मे है पहले आपका बेटा है,अगर ऐसी बात थी तो आपने शादी से पहले ही कह दिया होता।और दूसरी बात ये कि अभी तो बच्चो के हाथों की मेहंदी ही नहीं उतरी कि आप खर्चे की बात कह रहे हो,अगर मेरी बेटी के कारण आपका खर्चा बढ़ गया है तो कल से मेरी बेटी को वापस मेरे घर भेज देना।पापा की ये बात सुनकर मेरे ससुर इतने भड़क गए और दोनों मे झगड़ा बढ़ गया।
अगले दिन पापा मुझे अपने सुसराल लेने आ गए ।मैं पापा को मना नहीं कर पाई और पीहर चली गई।वहां जाने के बाद पापा ने मेरे सुसराल के बारे मे बहुत कुछ पूछा और मैंने घूंघट से लेकर खर्चे तक की सारी बाते बता दी,क्योकि झूठ बोलने की आदत जो नहीं थी।अब तो पापा इतना गुस्सा हुए कि मुझे सुसराल जाने के लिए मना कर दिया ।उस समय दोनों ही घरों मे कोई फ़ोन नहीं था।मेरा और मेरे पति का कोई कॉन्टेक्ट नहीं हो पाया।मैं अपने पीहर से ही ब्यूटी पार्लर की नोकरी पर जाती थी।एक दिन मेरे पति मुझसे मिलने वहां पार्लर पर आ गए।उन्होंने मुझसे घर चलने के लिए कहा लेकिन पापा की अनुमति के बिना उनके साथ जाने की हिम्मत नहीं थी।कुछ दिन बाद मेरे पति मुझे लेने आये और पापा से बात करी कि अब आपको कोई शिकायत नहीं मिलेगी,मैं इसको मेरी जिम्मेदारी पर ले जाता हूँ।मैं भी वापस जाना चाहती थी,मेरी मम्मी ने भी पापा को समझाया कि सुसराल मे तो छोटी मोटी बाते होती रहेगी इसे जाने दो।बड़ी मुश्किल से पापा मुझे भेजने के लिए माने मैं वापस अपने पति के साथ घर चली गई। घर गई और अगले दिन से फिर से वही तानो का सिलसिला चालु हो गया और मुझे सास ससुर ने कहा कि पीहर गई तो भी आना तो यही पड़ा।इस तरह उस घर मे रोज मेरे साथ मानसिक अत्याचार होते रहे।सास ससुर रोज पति से खर्चा मांगते और पति खर्चा देने को तैयार नहीं। मैं दोनों पासो के बीच पिसती जा रही थी।इस तरह दिन गुजरते गए और मेरा प्रेगनेंसी का छठा महीना लग गया ।एक दिन की बात है,घर मे कुछ कंस्ट्रक्शन काम कराने के लिए सासु जी ने रेती का ट्रैक्टर डलवाया।क्योकि घर के बाहर सड़क पर रेती डलवाने की वजह से आने जाने वाले लोगो के लिए मुश्किल हो रही थी इसलिए रेती को जल्दी से अंदर शिफ्ट करना था।उस दिन मेरे पार्लर की छुट्टी थी,मैं अपनी पढाई की तैयारी कर रही थी कि
सासुजी ने ताने चालु कर दिए कि दोनों टाइम खाना तो खाती है,खर्चा तेरा पति देता नहीं है और काम चोर को काम करना पड़ता है तो किताबे लेकर बैठ जाती है।। उनकी बात सुनते ही मेरे अंदर ऐसी आग लगी कि गुस्से से उठी और उठकर एक तगारी ली और बाहर से रेती भर कर अंदर डालने लग गई और मन ही मन संकल्प लिया कि जब तक ये रेती पूरी अंदर न डाल दु ,पानी तक नहीं पिउंगी। मेरा छठा महीना चल रहा था । गर्मी के कारण गला सुख रहा था और जी मचलाने लग गया।उसके बाद तो सासु जी ने भी मुझे बार बार मना किया कि अब रेती मत डाल, मैं तो ऐसे ही मजाक कर रही थी।
एक दिन की बात है मेरे पापा और मेरे ससुर की रास्ते मे मुलाक़ात हो गई।पापा ने हालचाल पूछा तो मेरे ससुर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आपका दामाद घर के खर्चे नहीं उठाता,आप उसे समझा देना।पापा ने अपने उत्तर मे कहा कि वो मेरा दामाद बाद मे है पहले आपका बेटा है,अगर ऐसी बात थी तो आपने शादी से पहले ही कह दिया होता।और दूसरी बात ये कि अभी तो बच्चो के हाथों की मेहंदी ही नहीं उतरी कि आप खर्चे की बात कह रहे हो,अगर मेरी बेटी के कारण आपका खर्चा बढ़ गया है तो कल से मेरी बेटी को वापस मेरे घर भेज देना।पापा की ये बात सुनकर मेरे ससुर इतने भड़क गए और दोनों मे झगड़ा बढ़ गया।
अगले दिन पापा मुझे अपने सुसराल लेने आ गए ।मैं पापा को मना नहीं कर पाई और पीहर चली गई।वहां जाने के बाद पापा ने मेरे सुसराल के बारे मे बहुत कुछ पूछा और मैंने घूंघट से लेकर खर्चे तक की सारी बाते बता दी,क्योकि झूठ बोलने की आदत जो नहीं थी।अब तो पापा इतना गुस्सा हुए कि मुझे सुसराल जाने के लिए मना कर दिया ।उस समय दोनों ही घरों मे कोई फ़ोन नहीं था।मेरा और मेरे पति का कोई कॉन्टेक्ट नहीं हो पाया।मैं अपने पीहर से ही ब्यूटी पार्लर की नोकरी पर जाती थी।एक दिन मेरे पति मुझसे मिलने वहां पार्लर पर आ गए।उन्होंने मुझसे घर चलने के लिए कहा लेकिन पापा की अनुमति के बिना उनके साथ जाने की हिम्मत नहीं थी।कुछ दिन बाद मेरे पति मुझे लेने आये और पापा से बात करी कि अब आपको कोई शिकायत नहीं मिलेगी,मैं इसको मेरी जिम्मेदारी पर ले जाता हूँ।मैं भी वापस जाना चाहती थी,मेरी मम्मी ने भी पापा को समझाया कि सुसराल मे तो छोटी मोटी बाते होती रहेगी इसे जाने दो।बड़ी मुश्किल से पापा मुझे भेजने के लिए माने मैं वापस अपने पति के साथ घर चली गई। घर गई और अगले दिन से फिर से वही तानो का सिलसिला चालु हो गया और मुझे सास ससुर ने कहा कि पीहर गई तो भी आना तो यही पड़ा।इस तरह उस घर मे रोज मेरे साथ मानसिक अत्याचार होते रहे।सास ससुर रोज पति से खर्चा मांगते और पति खर्चा देने को तैयार नहीं। मैं दोनों पासो के बीच पिसती जा रही थी।इस तरह दिन गुजरते गए और मेरा प्रेगनेंसी का छठा महीना लग गया ।एक दिन की बात है,घर मे कुछ कंस्ट्रक्शन काम कराने के लिए सासु जी ने रेती का ट्रैक्टर डलवाया।क्योकि घर के बाहर सड़क पर रेती डलवाने की वजह से आने जाने वाले लोगो के लिए मुश्किल हो रही थी इसलिए रेती को जल्दी से अंदर शिफ्ट करना था।उस दिन मेरे पार्लर की छुट्टी थी,मैं अपनी पढाई की तैयारी कर रही थी कि
जब जब कोई भी मेरे आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाता है उस समय जो क्रोध मुझे आता है वो क्रोध कब एक शक्ति बनकर काम कर जाता है,मैं खुद भी नहीं समझ पाती।अपने पूरे जीवन मे मैंने कई बार ऐसी शक्ति को महसूस किया और
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