मेरा सच चरण 6- वो निश्छल प्रेम

इस तरह  चिठ्ठी पढ़ते ही नाना जी हमें लेने आ जाते। मम्मी  हल्दी वाले परांठे साथ मे देकर हमें विदा करती थी।मम्मी की आँखे नम हो जाती थी ,आखिर पुरे 2 महीने के लिए मम्मी से दूर जो जाते थे।पर मुझे और मेरे भाई को ननिहाल जाते हुए इतनी ख़ुशी होती थी कि हमें मम्मी की निराशा भी नहीं दिखती थी।हम तो ऐसे नानाजी के साथ जाते थे जैसे किसी कैदखाने से छूट कर अपने घर जा रहे हो।पापा की रोज रोज की डांट और प्रतिबन्ध से कुछ दिनों के लिए मुक्ति जो मिल रही थी।।उदयपुर से बस मे बैठते और गोगुंदा उतरते थे।गोगुंदा से मेरे ननिहाल जाने के लिए केवल 2 ही बसे थी जो इतनी भरी हुई होती थी कि ऊपर नीचे लोग लटककर जाते थे

=
।।उस बस की भीड़ देखकर ही हम घबरा जाते थे।इसलिए नाना जी गोगुंदा से हमें पैदल ले जाते थे। मेरे भाई को नाना जी अपने कंधे पर बिठाते थे और एक हाथ से मेरी ऊँगली पकड़कर ले जाते थे।।थोड़ी दूर तक चलते और फिर एक बहुत बड़ा पेड़ आता था,वही पर एक कुआ होता था।हम उस पेड़ की छाया मे बैठते और नाना जी कुए से पानी निकालते।फिर वहीँ बैठकर हल्दी वाले पराठे खाते।। थोड़ी देर विश्राम करके फिर नानाजी हमको पैदल चलाते और हँसाते हँसाते हमें गाँव ले जाते।। वहां गाँव मे नानी जी हमारा बेसब्री से इन्तजार कर रही होती थी।जैसे ही हमें देखती थी ख़ुशी से फूली नहीं समाती थी और मुझे और मेरे भाई को चूम चुम कर लाड़ करती थी।।नाना जी का एक कच्चे केलू का कमरा था जिसमे  एक छोटी सी चिमनी का उजाला करा होता था

=
क्योंकि उस पुरे गाँव मे कही लाइट नहींथी।चिमनी के उजाले मे हम सब खाना खाते थे और ढेर सारी बाते करते करते सो जाते थे। उन अभावो के बीच मे जो निश्छल प्रेम होता था वो 
अनमोल था।  
      आज भी उन स्मृतियों को भूल नही पाती हूँ।अब नाना नानी नही रहे,लेकिन दिल के किसी कोने मे वो आज भी मुझे आवाज देते है,जिसे कई बार मैं महसूस करती हूं।अच्छे और सच्चे लोग इस दुनिया मे जाने के बाद भी अमर हो जाते है और यही कारण है कि उनके उस टूटे फूटे जर्जर घर पर आज भी उनके होने का अहसास होता है,और मुझे ही नहीं बल्कि किसी अनजान शख्स को भी वहाँ ले जाया जाए तो उसे भी कुछ महसूस हो जाता है,क्योंकि सत्य कभी नहीं मरता,वो तो खुशबू बनकर हमेशा जिंदा रहता है। 
नाना जी माता जी के भक्त थे और उनमें एक दिव्य तेज था,जिनका स्पर्श पाकर बीमार इंसान भी स्वस्थ हो जाता था।आज भी गाँव के बीचों बीच मेरे नाना नानी की समाधि बनी हुई है,जहाँ आते जाते लोग उन्हें प्रणाम करते है।
         
 "गया फूल थारी रह गई रे वासना 
       रह गयो रे अमर नाम"

Comments

Popular posts from this blog

भक्त नरसी मेहता - अटूट विश्वास

एक सत्य कहानी-बापकर्मी या आपकर्मी

भक्ति की महिमा- सेनजी महाराज के जीवन का सच