मेरा सच-चरण 29 - पूर्वजो के दर्शन की प्राप्ति और पति का मेरे जीवन से जाना ।
2016 का पूरा साल मुझे कुछ न कुछ चमत्कारिक घटनाएं दिखती रही,और साथ साथ मुझे अंदर से एक शक्ति भी महसूस हो रही थी।इस तरह हिम्मत रखते रखते 2016 भी ख़त्म हो गया।
2017 प्रारम्भ हो गया।2017 मे हर रात मुझे एक स्वप्न्न आता था और हर स्वप्न्न मुझे ईश्वर के साथ होने का संकेत देता था।एक रात को सपना आया कि की मूर्ति के चारो तरफ नाग देवता का झुण्ड थाऔर बीच मे शिव जी की मूर्ति थी और उनकी मूर्ति से फूल गिर रहे थे।
फिर एक रात सपना आया कि मैं अकेली नदी पार कर रही हु,लेकिन मैं पानी से डर रही थी,इसलिए बार बार अपना पैर पीछे ले रही थी,उतने मे मेरी प्रिय सहेली कैलाश दीदी कुछ पत्थर उस पानी मे रख रही थी।सारे पत्थर पानी मे तैर रहे थे।
उसके बाद मेरी सहेली हाथ पकड़कर मुझे वो नदी पार करा रही थी।जब नदी का अंतिम छोर आया तो मेरी सहेली गायब हो गई और वहां पर शेषनाग का फन आ गया
और मैंने उस शेषनाग के फन पर पैर रखा और सपना टूट गया।
एक रात फिर एक सपना आया।साक्षात देवी माँ एक चांदी के सिंहासन पर बैठे हुए थे।उनके पास मेरे स्वर्गीय पिता जी भी बैठे हुए थे।मेरे पिताजी ने मुझसे कहा कि,राधा,तू क्यों चिंता करती है।तू जिन उसूलो और सच्चाई पर चल रही है,उस रास्ते मे ये देवी माँ तेरे साथ चल रही है।ये कहकर वो गायब हो जाते है और फिर सपना टूट जाता है।फिर एक दिन सपने मे मेरे स्वर्गीय दादा जी आते है और आशीर्वाद देते है।फिर एक दिन मेरे स्वर्गीय नाना जी और स्वर्गीय नानी जी आते है।एक के बाद एक मरे हुए पूर्वज आते है और मुझे आशीर्वाद देकर गायब हो जाते है।
चाहे मेरा जीवन बहुत कठिन रहा लेकिन मेरे साथ बहुत सारी शक्तियां काम कर रही थी।
8 दिसम्बर 2017 की बात थी।मैं और मेरा बेटा रात को सो रहे थे कि सुबह के 5 बजे मेरे फ़ोन पर घंटी बजी।मैने पहले तो नींद मे अलार्म समझ कर फ़ोन काट दिया ।लेकिन फिर वापस फ़ोन आया तो मैंने हाथ मे लिया तो देखा मेरे पति के नंबर से फ़ोन आ रहा था मैं चोंक गई कि मेरे पति दूसरे कमरे मे सो रहे है तो फ़ोन क्यों आया।मैंने पहले उठ कर उनके कमरे मे झांक कर देखा तो वो नहीं थे और मैन दरवाजा भी खुला था।मैंने झट से उनका फ़ोन उठाया तो पता चला कि वो हॉस्पिटल में थे।मेरे सासुजी को हार्ड प्रॉब्लम हो गई थी तो उनको एडमिट कराया था।कुछ ही देर मे वापस फ़ोन आया कि उनकी death हो गई।मैंने भी सुना तो shoked हो गई और मन मे अजीब सा डर लगने लगा।मैंने तुरंत अपने बेटे को जगाया और दोनों ने बहुत सोचा कि हमें वहां जाना चाहिए या नहीं।क्योकि एक तरफ मेरा बरसो का युद्ध था जो मैं अपने पति और सुसराल वालो से लड़ रही थी तो दूसरी तरफ लोक लाज का भय था।मुझे और मेरे बेटे को कोई भी नकली दिखावा पसंद नहीं था।जहाँ बरसो तक मुझे और मेरे बेटे को सम्मान नहीं मिला,हमें जिस आदमी से प्रेम नहीं मिला उसके साथ झूठा रोना कैसे रोए।मेरी सास के जाने का दुःख मुझे और मेरे बेटे को बहुत हुआ,इसलिये नहीं कि वो मेरी सास और मेरे बेटे की दादी थी,बल्कि इसलिए दुःख हुआ कि एक अच्छी जिंदगी को वो अच्छे से जी नहीं पाए।जीवन भर कंजुसी करते रहे और अंत मे सब कंजुसी का बचाया हुआ यहीं छोड़कर दुनिया से चले गए।मेरे पति और मेरे सुसराल वालों को केवल उनके पैसों से मतलब था लेकिन मुझे और मेरे बेटे को केवल प्रेम से मतलब था जो हमें मिल न पाया।अब अगर चले भी जाते तो कोई मतलब नहीं था।इसलिये हमने निश्चय किया कि हम मात्र 12 दिन का दिखावा करने नहीं जायेंगे।इसलिए मैं और मेरा बेटा वहां नहीं गए।ये निर्णय हमने अपने दिल पर पत्थर रख कर लिया,लेकिन इस निर्णय से पूरे समाज को हमारी कहानी का पता चल गया जो अब तक लोगो से अनजान थी।आखिर सच्चाई तो सामने लानी ही थी जो अपने आप सामने आ गई।कई लोगो ने मुझे कहा कि ये अच्छा नहीं किया,आखिर मरने पर तो सब जाते है।मैं उनको यही कहती रही कि जीते जी अगर प्रेम न होतो मरने के बाद किसको दिखाने जाते है।मेरी बात सच्चाई के हिसाब से बिल्कुल सही थी पर दुनिया के हिसाब से बहुत गलत थी। मैं भी 12 दिन तक मन पर बोझ लेकर घूमती रही ।लेकिन क्या करूँ,अपने आप से वादा जो किया था कि गलत के सामने कभी नहीं झुकूँगी।अन्याय का सामना करुँगी।इसलिए ये सब तो होना ही था।जैसे ही उनके 12 दिन पूरे हुए कि एक रात मुझे फिर एक सपना आया।सपने मे मै सुखदेवी माता के मंदिर मे दर्शन करने जा रही थी।
उस समय बहुत तेज बारिश हो रही थी,मैं मंदिर मे प्रवेश कर ही रही थी कि पीछे से मुझे एक आवाज सुनाई दी कि ए राधा!मैं तुझे कब से आवाज लगा रही हु तू सुन नहीं रही है।मैंने पीछे मुड़कर देखा तो मेरे सासुजी एकदम जवान रूप मे, गुलाबी साड़ी पहने हुए,लाल लिप्सिटिक लगी हुई,लंबे काले खुले बाल मे खड़े थे।
मुझे उन्होंने अपने पास बुलाया और गले लगाकर बहुत रोए,और मुझसे कहा कि,राधा ,मुझे माफ़ कर दे।मै तुझे समझ नहीं पाई,तू तो प्रेम चाहती थी,पर मैंने पैसों को ही सबकुछ समझा।मैं अपनीआदत के कारण अपना जीवन अच्छे से नहीं जी पाई।आज मुझे पता चला कि प्रेम से बड़ा कोई धन नहीं होता।अब जो होना था वो तो हो गया,पर मेरी बात मानकर तू वापस उस घर पर चली जा,मैं अपने बेटे को भी समझा दूंगी।ये सब बातें उन्होंने मुझसे कही तो मैंने उनको कहा कि अब उस घर मे मैं वापस कभी नहीं जाउंगी।मुझे संपति का कोई लालच नहीं,मुझे तो सच्चा प्रेम चाहिए था जो न आपने दिया न आपके बेटे ने।इस पर मेरी सासुजी बोले कि तू बड़ी जिद्दी हैमैंने उनसे कहा कि हाँ मैं जिद्दी तो बहुत हु।इस पर वो बोले कि भले ही तू जिद्दी है पर तू मन की सच्ची है,तेरी हर बात मे सच्चाई है,इसलिये तू जहाँ कही भी रहेगी मेरा आशीर्वाद हमेशा तेरे साथ रहेगा।ये कहकर उन्होंने अपना हाथ मेरे सिर पर रखा और वो गायब हो गए।तभी सपना टूट गया,उठकर घड़ी देखी तो सुबह के साढ़े 4 बज रहे थे।कहते है सुबह के सपने हमेशा सच होते है।स्वप्न में उनका इस तरह से बात करने से मेरे मन का पूरा बोझ उतर गया।
2017 प्रारम्भ हो गया।2017 मे हर रात मुझे एक स्वप्न्न आता था और हर स्वप्न्न मुझे ईश्वर के साथ होने का संकेत देता था।एक रात को सपना आया कि की मूर्ति के चारो तरफ नाग देवता का झुण्ड थाऔर बीच मे शिव जी की मूर्ति थी और उनकी मूर्ति से फूल गिर रहे थे।
फिर एक रात सपना आया कि मैं अकेली नदी पार कर रही हु,लेकिन मैं पानी से डर रही थी,इसलिए बार बार अपना पैर पीछे ले रही थी,उतने मे मेरी प्रिय सहेली कैलाश दीदी कुछ पत्थर उस पानी मे रख रही थी।सारे पत्थर पानी मे तैर रहे थे।
एक रात फिर एक सपना आया।साक्षात देवी माँ एक चांदी के सिंहासन पर बैठे हुए थे।उनके पास मेरे स्वर्गीय पिता जी भी बैठे हुए थे।मेरे पिताजी ने मुझसे कहा कि,राधा,तू क्यों चिंता करती है।तू जिन उसूलो और सच्चाई पर चल रही है,उस रास्ते मे ये देवी माँ तेरे साथ चल रही है।ये कहकर वो गायब हो जाते है और फिर सपना टूट जाता है।फिर एक दिन सपने मे मेरे स्वर्गीय दादा जी आते है और आशीर्वाद देते है।फिर एक दिन मेरे स्वर्गीय नाना जी और स्वर्गीय नानी जी आते है।एक के बाद एक मरे हुए पूर्वज आते है और मुझे आशीर्वाद देकर गायब हो जाते है।
चाहे मेरा जीवन बहुत कठिन रहा लेकिन मेरे साथ बहुत सारी शक्तियां काम कर रही थी।
8 दिसम्बर 2017 की बात थी।मैं और मेरा बेटा रात को सो रहे थे कि सुबह के 5 बजे मेरे फ़ोन पर घंटी बजी।मैने पहले तो नींद मे अलार्म समझ कर फ़ोन काट दिया ।लेकिन फिर वापस फ़ोन आया तो मैंने हाथ मे लिया तो देखा मेरे पति के नंबर से फ़ोन आ रहा था मैं चोंक गई कि मेरे पति दूसरे कमरे मे सो रहे है तो फ़ोन क्यों आया।मैंने पहले उठ कर उनके कमरे मे झांक कर देखा तो वो नहीं थे और मैन दरवाजा भी खुला था।मैंने झट से उनका फ़ोन उठाया तो पता चला कि वो हॉस्पिटल में थे।मेरे सासुजी को हार्ड प्रॉब्लम हो गई थी तो उनको एडमिट कराया था।कुछ ही देर मे वापस फ़ोन आया कि उनकी death हो गई।मैंने भी सुना तो shoked हो गई और मन मे अजीब सा डर लगने लगा।मैंने तुरंत अपने बेटे को जगाया और दोनों ने बहुत सोचा कि हमें वहां जाना चाहिए या नहीं।क्योकि एक तरफ मेरा बरसो का युद्ध था जो मैं अपने पति और सुसराल वालो से लड़ रही थी तो दूसरी तरफ लोक लाज का भय था।मुझे और मेरे बेटे को कोई भी नकली दिखावा पसंद नहीं था।जहाँ बरसो तक मुझे और मेरे बेटे को सम्मान नहीं मिला,हमें जिस आदमी से प्रेम नहीं मिला उसके साथ झूठा रोना कैसे रोए।मेरी सास के जाने का दुःख मुझे और मेरे बेटे को बहुत हुआ,इसलिये नहीं कि वो मेरी सास और मेरे बेटे की दादी थी,बल्कि इसलिए दुःख हुआ कि एक अच्छी जिंदगी को वो अच्छे से जी नहीं पाए।जीवन भर कंजुसी करते रहे और अंत मे सब कंजुसी का बचाया हुआ यहीं छोड़कर दुनिया से चले गए।मेरे पति और मेरे सुसराल वालों को केवल उनके पैसों से मतलब था लेकिन मुझे और मेरे बेटे को केवल प्रेम से मतलब था जो हमें मिल न पाया।अब अगर चले भी जाते तो कोई मतलब नहीं था।इसलिये हमने निश्चय किया कि हम मात्र 12 दिन का दिखावा करने नहीं जायेंगे।इसलिए मैं और मेरा बेटा वहां नहीं गए।ये निर्णय हमने अपने दिल पर पत्थर रख कर लिया,लेकिन इस निर्णय से पूरे समाज को हमारी कहानी का पता चल गया जो अब तक लोगो से अनजान थी।आखिर सच्चाई तो सामने लानी ही थी जो अपने आप सामने आ गई।कई लोगो ने मुझे कहा कि ये अच्छा नहीं किया,आखिर मरने पर तो सब जाते है।मैं उनको यही कहती रही कि जीते जी अगर प्रेम न होतो मरने के बाद किसको दिखाने जाते है।मेरी बात सच्चाई के हिसाब से बिल्कुल सही थी पर दुनिया के हिसाब से बहुत गलत थी। मैं भी 12 दिन तक मन पर बोझ लेकर घूमती रही ।लेकिन क्या करूँ,अपने आप से वादा जो किया था कि गलत के सामने कभी नहीं झुकूँगी।अन्याय का सामना करुँगी।इसलिए ये सब तो होना ही था।जैसे ही उनके 12 दिन पूरे हुए कि एक रात मुझे फिर एक सपना आया।सपने मे मै सुखदेवी माता के मंदिर मे दर्शन करने जा रही थी।
सच्चा प्रेम कभी मरता नहीं है,इसीलिए जीते जी मेरे सासुजी मेरे प्रेम को समझ नहीं पाए फिर भी मरने के बाद अपने आत्म स्वरूप मे मुझे दर्शन दिए और प्रेम के सामने नतमस्तक हुए।
प्रेम कभी हारता नहीं है।इंसान के मरने के बाद भी जीत प्रेम की ही होती है।यही अटल सत्य है।
मेरे सासु जी के जाने के बाद मेरे पति वापस मेरे साथ रहने नहीं आये ।क्योंकि उन्हें किसी भी कीमत पर उनके माता पिता के घर मे हक चाहिए था और मुझे बिना प्रेम का एक रुपया भी नहीं चाहिए था।वो अपनी संपत्ति लेने वहीं रुक गए और मैं अपने सत्य के साथ यहीं रुक गई।दोनो अलग अलग दिशाओ मे हो गए जब 6 महीने से ऊपर हो गए,वो नहीं आये तो मैंने भी अपने दिल को कठोर करके उन्हें भूलने की कोशिश कीऔर अपने पुत्र शुभम के साथ अकेले रहने की आदत डाल दी।क्योंकि
सत्य अकेला हो सकता है,निराश हो सकता है,अपमानित हो सकता है,पर कभी हार नही सकता।यही सत्य की पहचान है।
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