मेरे जन्म दिन का वो अविस्मरणीय दिन
23 अप्रेल 2019 का दिन था।मैं उस दिन अपनी मम्मी के यहाँ ही थी क्योंकि उस समय हाल ही मे 19 अप्रेल की मेरे भाई की शादी हुई थी।इसलिए मैं घर नहीं गई थी।करीबन 10 बजे शुभम ने कहा कि मम्मी मैं घर जा रहा हु,मुझे जरूरी काम है।वो 10 बजे मेरी मम्मी के यहाँ से घर के लिए निकल गया।घर पहुँच कर 1 घंटे बाद उसने मुझे फोन किया और कहा कि मम्मी कुछ जरूरी काम है,आप तुरंत घर आ जाओ।मैं चिंतित हो गई कि अभी तो वो यहाँ से निकला है और क्या काम हो सकता है।पर मेरे पूछने पर भी उसने नही बताया ।मुझे भी चिंता हुई तो मैं जल्दी से मम्मी के यहाँ से निकल गई और घर पहुंच गई।घर जाकर देखा तो मेरा पूरा घर गुलाब की खुशबू से महक रहा था।मैंने देखा कि चारो तरफ गुलाब के फूल बिछे हुए थे और शुभम की एक दोस्त ने ये सब किया था।टेबल पर गुलाब के फूलो के बीचों बीच लड्डू गोपाल जी बैठे हुए थे।और दीपक जल रहे थे।मेरी आँखें इस दृश्य को देखती ही रह गई कि मेरे जन्म दिन पर लड्डू गोपाल जी मेरे जीवन मे आये,इससे बड़ा तोहफा और क्या हो सकता था मेरे जन्म दिन का।मैंने शुभम की दोस्त आरू को और शुभम को ऐसे अदभुत sarprize के लिए धन्यवाद दिया।फिर मेरा केक काटा और हम कृष्ण जी के गाने पर खूब नाचे।मुझे मेरा बरसो का सपना पूरा होता नजर आया।आज से 10 साल से ही मैं लड्डू गोपाल जी की छवि को अपने मन मे बैठा रखा था।इन 10 सालो मे मैं जिस किसी के घर लड्डू गोपालजी को देखती तो उन पर मुग्ध हो जाती और कितने ही जनों से मैं उनके बारे मे ये पूछती रहती की इनकी सेवा कैसे की जाती है।जब कई लोग ये बता कर डरा देते थे कि लड्डू गोपाल की समय समय पर नियमपूर्वक पूजा की जाती है।इनकी पूजा मे एक दिन का भी व्यवधान नही चलता है।जब मैं ये सोचती तो उदास हो जाती,ये सोचकर कि मेरे व्यस्त जीवन मे मैं विधिविधान से इनकी सेवा कैसे कर सकती हूं?और इसी कारण कई बार नाथद्वारा से लड्डू गोपाल जी को लाते लाते रुक गई कि इनकी सेवा मैं नहीं कर पाउंगी।लेकिन इनको देखते ही मेरी दृष्टि इनकी और ललचाती रहती।
मुझे क्या पता कि ये दीनानाथ,ये कृपा निधान,ये अंतर्यामी,ये जगत पति मेरे मन की इच्छा को इस तरह पूरा करेंगे कि ईश्वर की किसी नेक बंदी के द्वारा ये मेरे घर पधारेंगे।ईश्वर के इतने चमत्कारों को मैं महसूस कर रही थी जिसको अभिव्यक्त भी नहीं कर सकती।वाह रे प्रभु,तेरी लीला।जन्म दिन के इस अनमोल तोहफे को जन्म जन्म तक नहीं भूल पाउंगी।
जय सावरिया सेठ की जय हो।
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