प्रकाश

प्रकाश मेरा छोटा भाई है,ये मुझसे दो साल ही छोटा है,इसलिए बचपन से ही हम एक दूसरे के बहुत साथ रहे।एक ही कक्षा मे पढ़े, इसलिए कक्षा की,स्कूल की हर बात एक दूसरे से शेयर करते थे।लड़ते भी बहुत थे,पर एक दूसरे से बोले बिना नहीं रहते थे।जब हम स्कूल जाते थे तो घर से ही अपने भाई प्रकाश का हाथ पकड़कर  स्कूल तक जाती थी,यहाँ तक कि कक्षा मे भी उसका हाथ नहीं छोड़ती थी।कई बार टीचर  मजबूरन हमे एक दूसरे से दूर बिठाती थी,लेकिन हम फिर दूसरे दिन साथ मे बैठ जाते थे।हम दोनों भाई बहनों  की स्कूल मे भी एक पहचान बन गई थी।क्योंकि स्कूल के हर एक्टिविटी मे हम दोनों भाग लेते थे।वाद विवाद प्रतियोगिता मे हम दोनों भाई बहन एक दूसरे के विपक्ष मे खड़े होते थे।कभी वो जीत जाता तो कभी मैं जीत जाती ।
हम दोनों भाई बहनों मे जहाँ एक दूसरे से इतना गहरा प्यार है,वहीं दूसरी ओर हमारी विचारधारा एक दूसरे से बिल्कुल विपरीत है।और इसी विपरीत विचारधारा के कारण हम  असल जीवन मे भी वाद विवाद  करते रहते है।और स्कूल की वाद विवाद प्रतियोगिता की तरह ही आज भी कभी उसकी बात जीत जाती है तो कभी मेरी।विपरीत आचरण और विपरीत विचारधारा के बावजूद भी हमारा प्रेम कभी कम नहीं हुआ।मेरी शादी के बाद जब मेरे जीवन मे परेशानिया आई तो मेरे भाई को बहुत तकलीफ होती थी।वो हमेशा कोशिस करता कि मैं कैसे भी करके खुश रहूं, लेकिन मेरे भाग्य को वो भी कैसे बदल सकता था।वो हमेशा से ही मेरी मदद करने की हर संभव कोशिश करता था,पर मेरा स्वाभिमान मुझे किसी की मदद लेने के लिए मना करता था।मेरी हमेशा से ही यही  कोशिश रही है कि मैं अपने जीवन की हर परिस्थिति का अकेले ही सामना करूँ, किसी से मदद लिए बिना अपनी मदद खुद करूँ, और इसी वजह से अपने प्रिय भाई से कभी मदद न ले पाई।पर उसकी  मेरे प्रति जो सहानुभूति थी,वो एक शक्ति बनकर,एक अदृश्य मदद बनकर हमेशा मेरे साथ रही।जीवन के उतार चढ़ाव मे कई बार परिस्थितियों ने हमे दूर करने की कोशिश करी,पर कहते है सच्चा प्रेम कभी किसी को दूर नहीं कर सकता।हम दोनों भाई बहनों का प्रेम अंतरात्मा से है,जो  हमेशा अमर रहेगा।
मेरा भाई बहुत ही मेहनती है,जिसने अपनी कड़ी मेहनत से अपना एक घर बनाया,जिसका नाम पिपलाज विला रखा ,जो हमारी पिपलाज माता जी के नाम पर रखा गया।
इन्ही पिपलाज माता जी के कारण ही हम दोनों भाई बहनों मे अब तक प्रेम बना रहा।
प्रकाश को प्रेम से हम सब पप्पू के नाम से ही बुलाते है।पप्पू को मेरे पापा की  तरह ही परिवार को साथ लेकर चलने मे बहुत खुशी होती है,इसीलिए वो पूरे परिवार का ध्यान रखता है।हर रविवार को समय निकालकर दादी जी से मिलने गाँव जाता है,उनके आवश्यकता की चीजें देकर आता है,उनकी खुशलमंगल पूछ कर आता है।इतना ही नहीं अभी 2018 मे दादी जी के लिए गाँव मे नया मकान बनवाया।मेरी एक छोटी बहन को अपना एक घर दे दिया,हम तीनों बहनों के बच्चों को वो बहुत प्यार करता है ।हम तीनों बहनों के बच्चे भी मामा से बहुत प्यार करते है।मेरा बच्चा जब चौथी क्लास मे था तब एक दिन अचानक उसको मार्केट ले गया और जब वापस घर आया तो एक नई साईकल के साथ आया।

मेरे बेटे ने पहली बार साईकल चलाई और वो भी मामा की दी हुई उपहार  स्वरूप  साईकल।उसके बाद 2017 मे जब मेरा बेटा18 साल का पूरा ही हुआ था और फिर मेरे भाई पप्पू ने उसके जन्म दिन पर बाइक उपहार मे दी।वो दिन बहुत ही अविस्मरणीय दिन था।
17 फरवरी 2017 का दिन था।उस दिन मेरे बच्चे का जन्म दिन था।16 फरवरी की रात को 12 बजे अचानक दरवाजे की घंटी बजी।मैंने दरवाजा खोला तो देखा कि मेरे सभी भाई बहन शुभम को हैप्पी बर्थडे बोलते हुए एकदम से अंदर आये।शुभम कंप्यूटर पर उसका कुछ काम कर रहा था,अचानक वो भी चोंक गया।मेरे भाई ने एक अद्धभुत सरप्राइज दिया। उसके हाथ मे एक बड़ा सा कार्टून का बक्सा था,जिसमे सरप्राइज गिफ्ट था।शुभम के साथ उस बॉक्स की पैकिंग खुलवाई ।उस बॉक्स की पैकिंग इतनी अलग थी कि एक के बाद एक बक्सा उसमे से निकल रहा था लेकिन मैं और शुभम समझ ही नही पा रहे थे आखिर इस बक्से मे क्या उपहार हो सकता है।कम से कम 7 या 8 बक्से के बाद अंत मे बहुत सारे फलों के साथ एक छोटी सी डिब्बी थीउस डब्बी को खोलने के लिए सबने उसकी आँखों पर पहले पट्टी बांधी और फिर सब जने उसको मेरे अपार्टमेंट के ग्राउंड फ्लोर पर लेकर गए।वहाँ जाकर देखा तो एक बाइक पर चद्दर से ढंक रखा  था फिर अचानक शुभम उस डब्बी को खोलता है तो उसमें बाइक की चाबी होती है।और उसकी आँखों के सामने बहुत सारे गुब्बारे लगी हुई बाइक होती है,जिसे देखकर मेरे और शुभम की आंखों मे आंसू आ गए,और मेरे सभी भाई बहन,उनके बच्चे सब भावुक होकर रोने लगे।मेरे भाई ने इतना बड़ा सरप्राइज जो दिया था।फिर सबने बारी बारी से बाइक पर बैठकर फ़ोटो खींचवाये और फिर पूरी रात सबने बाते करी,एन्जॉय किया।अगले दिन 17 फरवरी को पूरे दिन उसी बाइक को लेकर कई जगह दर्शन किये और शाम को होटल मे खाना खाया।ये दिन हम सब भाई बहनों के लिए बहुत ही खुशी वाला दिन था,विशेषतौर पर मेरे भाई पप्पू और शुभम के लिए तो बहुत ही खास दिन था,क्योंकि उपहार देने वाला और लेने वाला दोनो को जो खुशी होती है वो बहुत ही अनमोल होती है।
  मामा का जो प्यार था वो प्यार पप्पू ने बहुत ही खूबसूरती से निभाया था।
           इसी तरह प्रकाश यानी पप्पू ने पूरे परिवार के साथ निभाया।मेरा एक छोटा भाई जो मुझसे 15 साल छोटा है,पापा के जाने के बाद 14 साल से मेरा भाई पप्पू उसको अपने पुत्र की तरह ही रखता हैउसको पढ़ाया,उसका पालन किया,उसकी आवश्यकता की हर वस्तु उसको उपलब्ध करता है।और मेरी मम्मी को भी हर तरह से अच्छा रखता है,उनका ध्यान रखता है।
    19 अप्रेल 2019 को उसने मेरे छोटे भाई अरुण की शादी बहुत ही धूमधाम से करी, और पापा का अधूरा सपना पूरा करके अपने कर्तव्य का पालन किया।उसने अपना कर्तव्य निभाने मे किसी प्रकार की कमी नहीं रखी और बहुत खुशी से इस कार्य को पूरा किया।
     पर कहते है एक खुशी के साथ एक गम जुड़ा होता है,इस शादी के एक महीने बाद ही पप्पू के ऑफिस को बरसों से संभाल रही एक कार्यकर्ता मेडम का आकस्मिक दुर्घटना मे देहांत हो गया।इस घटना ने मेरे भाई को पूरी तरह से तोड़ कर रख दिया क्योंकि वो मेडम केवल एक कार्यकर्ता ही नहीं थी बल्कि इतनी ईमानदार ,वफादार और सच्ची थी जिसने प्रकाश के ऑफिस को अपने ऑफिस की तरह रखा,वहाँ के हर कार्य को पूजा समझ कर किया।
इस घटना के बाद मेरे भाई प्रकाश के चेहरे की खुशी ही गायब हो गई जिसका हमारे पूरे परिवार पर असर पड़ा क्योंकि उसके चेहरे की रौनक ही हमारे परिवार की असली दौलत है ।  
        कहने को वो मेडम एक ऑफिस मे कार्य करने वाली कार्यकर्ता ही थी पर जरूरी नहीं कि रिश्ता केवल खून का हो या किसी रिश्ते मे बंधा हुआ हो।इस दुनिया मे हर अच्छा प्राणी चाहे वो पशु पक्षी ही क्यों न हो,उससे लगाव होना स्वभाविक  है।और यही कारण था कि उन मेडम का स्वभाव बहुत ही अच्छा और हँसमुख था और अपने कार्य के प्रति इतनी जागरूकता हर किसी को अपना दीवाना बना देता है।
      उन मेडम की जो कमी है,वो हमारा पूरा परिवार जीवन भर उसे महसूस करेगा,उन्हें याद करेगा।
बस ईश्वर से यही दुआ है कि मेरे भाई को जीवन मे हर कठिन पल को लड़ने की हिम्मत मिले और खुशी खुशी ईश्वर के फैसले को स्वीकार करके आगे बढ़े।
     मेरे भाई प्रकाश का मेरे साथ शायद कई जन्मों का रिश्ता रहा इसीलिए उसका दुःख मुझे बिल्कुल बरदाश्त नहीं होता,उसकी खुशी ही मुझे सुकून देती है।
           सत्यम शिवम सुंदरम

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