नाती मासी

नाती मासी
ये मेरी छोटी मासी है।ये बचपन से मुझे बहुत प्यार करती है।जब मैं छोटी थी,तब इनकी शादी भी नही हुई थी।मैं गर्मी की छुट्टियों मे ननिहाल जाती तो नाती मासी ही मुझे नहलाती,खाना खिलाती,मुझे गोदी मे लेकर घूमती  थीं। मैं इनके बिल्कुल चुपककर ही रहती।

जहाँ जाती,साथ साथ  जाती,रात को भी मासी से लिपटकर ही सोती थी।यहाँ तक की ,रात को अगर मासी करवट भी ले लेती तो मैं जग जाती और उनको अपनी तरफ मुँह करके ही सोने की ज़िद करती।कई बार तो मेरी मासी परेशान हो जाती,क्योंकि वो कुँए पर पानी लेने जाती,तो भी मैं उनके साथ साथ जाती।एक बार गायो को चराने के लिए मेरी मासी के साथ मैं भी पहाड़ी पर गई।पहाड़ी इतनी ऊँची थी कि मुझसे चला ही नही जा रहा था,मेरी मासी ने मुझे अपने कंधे पर बैठाया और पहाड़ी पर चढ़ी।

मासी से इतना प्यार था कि जब वापस मासी से बिछड़ कर घर आती तो बहुत मुश्किल होता था।थोड़े समय बाद,जब मासी की शादी हुई तो मुझे ये बिल्कुल सहन नहीं हो रहा था कि मेरी मासी,किसी दुसरो के घर कैसे जा सकती है।उनकी विदाई पर मैंने उनकी साड़ी पकड़ ली कि आपको नहीं जाने दूँगी,और बहुत रोई ।थक हार कर घर वालो ने मुझे अपनी मासी के साथ ही भेज दिया।लेकिन मैंने एक पल के लिये भी अपनी मासी का हाथ नहीं छोड़ा।कोई भी मेरी मासी से बात करता या उनके पास आता तो मैं अपनी मासी के लिपटकर खड़ी हो जाती।

मेरे नए नवेले मासाजी को भी मासी से बात नहीं करने दी मैंने।उनके सुसराल वाले भी मुझसे परेशान हो गए,पर मेरा मन ये मानने को तैयार नहीं हो रहा था कि अब मासी पराई हो गई है।

मैं तो रो रो कर सबको यही कहती जा रही थी कि मेरी मासी केवल मेरी है।
बहुत समय बाद  मुझे धीरे धीरे  समझ आने लगा कि लड़की को शादी के बाद सुसराल जाना पड़ता है।फिर मैंने धीरे धीरे मासी  से मोह कम किया।लेकिन मेरे दिल मे मासी के लिए जो प्यार था वो आज भी है और हमेशा रहेगा।
        सौ साल पहले मुझे तुमसे प्यार था,आज भी है और कल भी रहेगा।             सत्यम शिवम सुंदरम

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