वैशाख मास का महत्व----बुद्ध पूर्णिमा 7 मई 2020
वैशाख माह का महत्व
वैशाख मास में ही अक्षय तृतीया आती है,इस दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था।अक्षय तृतीया के दिन किया गया कोई भी धर्म या दान का कभी क्षय नहीं होता है।कई लोग वैशाख मास मे राहगीरों के लिए प्याऊ की व्यवस्था करते है
।इस महीने प्याऊ लगवाना ,भूखे को खाना खिलाना,जूतों का दान करना,इत्यादि बहुत ही पुण्य कार्य माने जाते है। ये महीना दान पुण्य के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।गंगा जैसी पवित्र नदी का इस धरती पर आगमन भी इसी महीने हुआ था,इसलिए तीर्थ स्नान के लिए ये माह बहुत शुभ माना जाता है । आज के समय मे किसी नदी या कुंड पर नहाना सम्भव नहीं हो पाता है,इसलिए घर पर ही नहाते समय यदि गंगा जी का ध्यान कर ले तो भी उतना ही फल मिलता है जितना गंगा मे नहाने का।इस महीने जो सूर्य उगने से पहले स्नान करके ईश्वर की आराधना करते है,उसके शरीर के कई रोग स्वतः ही समाप्त हो जाते है।
वैसे भी सूर्य उगने से पहले उठने के कई फायदे है।सूर्य उगने से पहले उठने वाले का स्वास्थ्य हमेशा अच्छा रहता है।उसमे सकारत्मक ऊर्जा का संचार होता है।वैशाख मास में जितना हो सके विष्णु जी के नाम का स्मरण करना चाहिये
और शिव जी को जल से अभिषेक करना चाहिये।ऐसा करने से शिवजी और विष्णु जी की विशेष कृपा बनी रहती है।
वैशाख मास की दोनो एकादशी का भी विशेष महत्व है,
इन दोनों एकादशी पर जो निराहार रहकर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करते है,वो भव सागर पार होकर
मुक्ति के दरवाजे तक पहुंच जाते है।
वैशाख मास की पूर्णिमा को भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था,इसीलिए इस दिन को बुद्ध पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध को बोध गया मे बोध वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। बुद्ध पूर्णिमा के दिन सभी देवी देवताओं की भी पूजा की जाती है।
इस दिन जो लोग भागवत कथा या भगवत गीता का पाठ करता है या सुनता है वो स्वयं तो ईश्वर को पा लेता है साथ ही वो अपने पूर्वजों की आत्मा को भी मुक्ति दिलाता है।
सत्यम शिवम सुंदरम
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