देवी देवता और भगवान मे अंतर



हमारे हिन्दू धर्म मे अनेक देवी देवताओं का वर्णन है,जो किसी न किसी चमत्कार का उदाहरण है।हर देवी देवता की कोई न कोई कहानी है।देवी देवता भगवान नहीं है,वे एक साधारण मानव बनकर ही इस पृथ्वी पर जन्म लेते है,फिर अपने दिव्य कर्मो से उनमें एक शक्ति का उदय होता है और उसी शक्ति से वो संसार में अपनी लीला करते है, तब वो देवी देवता बनकर संसार मे पूजे जाते है।देवी देवता और भगवान मे अंतर है।

भगवान केवल एक ही है वो है श्री विष्णु।बाकी जितने भी नाम हम लेते है वो देव कहलाये।महादेव, ब्रह्मदेव,इंद्रदेव,पवनदेव,सूर्यदेव,इत्यादि इत्यादि।इसके बाद धरती पर जो अपने खुद के कर्मो से अपनी शक्ति जागृत करते है,वो सभी देवता कहलाये जिनकी पूजा हर घर मे अलग अलग नामों से की जाती है।जो देवी देवता जिस कुल मे जन्म लेकर अपनी रचना करते है,लोग उन्हीं को अपने कुलदेवता के रूप मे पूजने लगते  है। कुछ देवी देवता जन्म लेकर रचना करते है तो कुछ प्रकट होते है।जहाँ वो अपनी रचना करते है या प्रकट होते है,वहीं उनका मंदिर बन जाता है।हिन्दू धर्म मे 33 करोड़ देवताओ  ने इस पृथ्वी पर अपनी रचना करी है।हर कुटुम्ब मे एक देवता निर्धारित हो जाता है,और उसी को उसका पूरा कुल पूजने लगता है।जिस तरह हर परिवार का एक मुखिया होता है,उसी प्रकार हर परिवार का एक देवता होता है,जिसे कोई देवी माँ के रूप मे पूजते है तो कोई भेरू जी के रूप मे पूजते है।

ये देवी देवता एक मुखिया  की तरह ही अपने परिवार और आस पास के क्षेत्रों की रक्षा करते है।
देवी देवता कोई भी बन सकता है,पर भगवान कभी कोई नहीं बन सकता है।अगर कोई कठिन तप पर चले,अच्छे कार्य करे,निंदा से मुक्त हो,सबकी भलाई करें तो एक दिन उसमें वो दैवीय शक्ति आ जाती है और वो स्वयं भी देवता बनकर संसार मे पूजा जाता है।लेकिन उसकी दिव्य शक्ति को लोग उसके मरने के बाद ही देख पाते है।जीते जी उसकी शक्ति प्रकट नहीं होती है।
भगवान का लिखा हुआ अटल होता है उसको कोई देवता भी नहीं बदल सकते।जो सुख और दुःख भगवान ने हमारे लिए तय किये है,वो निश्चित है।देवी देवता केवल हमे उस दुःख और कठिनाइयों को पार कराने मे हमारी सहायता अवश्य करते है,पर किसी भी स्थिति को बदल नहीं सकते।देवी देवता हमारी शक्ति होती है,वो हमें दुःख से लड़ने की शक्ति प्रदान करते है और कुछ सीमा तक उनको ये वरदान होता है जिससे वो हमे किसी विपरीत परिस्थिति से निकाल पाते है,फिर भी इंसान को लड़ना खुद ही पड़ता है।

जो लोग निस्वार्थ भाव से देवी देवता को याद करते है,देवी देवता ऐसे लोगो की मदद जल्दी करते है।कई लोग देवी देवता को केवल अपने कार्य सिद्ध करने के लिए ही याद करते है,तो उनका प्रभाव कम हो जाता है।जो लोग देवी देवताओं से प्रेम करते है,वो एक पल के लिए भी उन्हें भूलते नहीं है।देवी देवताओं से प्रेम करने का मतलब केवल उनकी पूजा नहीं है।वो पूजा ,दीपक अगरबत्ती से खुश नहीं होते है,वो तो हमारे कर्मो से खुश होते है।अगर हम सबसे प्रेम करे,किसी का दिल न दुखाये,मन को बड़ा रखे,अपना समय लोगो के लिए दिल खोलकर खर्च करे,सबका भला सोचे,और हर खुशी के मौके पर देवी देवता को धन्यवाद दे तो देवी देवता ऐसी जगह पर बार बार आते है और हमारे हर दुःख सुख का ध्यान रखते है।हम देवी देवता से सच्चा प्रेम करते है तो वो भी हमसे वैसा ही प्रेम करेंगे,लेकिन ज्यादातर लोग देवी देवता को केवल डर के कारण पूजते है,जबकि देवी देवता कभी किसी के साथ बुरा नहीं करते।हमारे सुख और दुःख हमारे कई जन्मों के कर्मो के फल होते है,जो हर इंसान को भोगने ही पड़ते है,इसमें देवी देवता भी कुछ नहीं कर सकते। जिस तरह एक संतान की पीड़ा को माता पिता हिम्मत बंधा कर कम कर सकते है,वैसे ही देवी देवता भी हमारी पीड़ा को हिम्मत देकर कम कर सकते है,लेकिन फिर भी अपने हिस्से की पीड़ा तो उसी को भोगनी पड़ती है,उसे कोई मिटा नहीं सकता।ऐसा नहीं है कि जो देवताओ की पूजा करेगा उसे दुःख नहीं आएगा,दुःख तो निश्चित है,वो तो सबके आएगा,बस फर्क इतना है कि जो उनकी शरण मे होता है,बार बार देवताओ को याद करता है,उसमे वो शक्ति आ जाती है कि वो उस दुःख और पीड़ा को सहन कर लेता है।
 देवी देवता वहीं जाते है जहाँ प्यार है,
    झगड़े ,क्लेश,अभिमान ,स्वार्थ,लालच, होता है वहाँ देवता शीघ्र ही चले जाते है,फिर लोग केवल भ्रम मे दीपक जलाकर बैठे रहते है पर  देवता तो कोसो दूर जा चुके होते है।
जो लोग देवताओं को खुश रखना चाहते है,वो अपने अंदर उन सब गुणों को भर दे जिससे देवता हमे छोड़कर कभी न जाये,क्योंकि ये देवता ही एक दिन हमें उस परमात्मा के दर्शन करा देते है जिसे हम लोग भगवान कहा करते है।
   

 भगवान श्री कृष्ण ने गीता मे ये भी लिखा है कि इंसान किसी भी देवी देवता को पूजे,अंत मे वो पूजा मुझ तक ही आती है।मैं देवों मे भी देव हु,इसलिए ही मुझे परमेश्वर कहा है।मैं सृष्टि से पहले भी था और सृष्टि के बाद भी रहूंगा।
            सत्यमेव जयते
       

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